कम खर्च में गेहूं को मिलेगा नया जीवन; ‘डियर किसान’ ने साझा किया सूक्ष्म पोषक तत्वों का सबसे सटीक मिश्रण
गेहूं की फसल में पीलापन, कम फुटाव और रुकी हुई बढ़वार किसानों के लिए बड़ी चिंता का विषय होती है। ‘डियर किसान’ के ताजा वीडियो में इस समस्या का एक बेहद सस्ता और प्रभावी समाधान बताया गया है। अक्सर किसान बाजार से महंगे रेडीमेड पैकेट लाकर खेतों में डालते हैं, लेकिन इस वीडियो में बताए गए 5 अलग-अलग सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) का स्प्रे न केवल किफायती है, बल्कि इसका परिणाम भी बहुत तेज आता है। यह फॉर्मूला गेहूं की 30 से 60 दिन की किसी भी अवस्था में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे पौधों को जरूरी ताकत मिलती है और बालियां लंबी व चमकदार आती हैं।
5 मुख्य खाद और उनका सही संयोजन
इस ताकतवर स्प्रे को तैयार करने के लिए पांच प्रमुख तत्वों की आवश्यकता होती है:
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यूरिया (Urea): नाइट्रोजन की कमी पूरी करने के लिए।
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चिलेटेड जिंक 12% (Chelated Zinc): पौधों के विकास और हरेपन के लिए।
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मैग्नीशियम सल्फेट (Magnesium Sulphate): प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया तेज करने के लिए।
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मैंगनीज सल्फेट (Manganese Sulphate): दाने के भराव और मजबूती के लिए।
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चिलेटेड आयरन 12% (Chelated Iron): लोहे की कमी दूर करने और पीलापन हटाने के लिए। विशेषज्ञों का कहना है कि 21% या 33% वाले साधारण जिंक के बजाय चिलेटेड जिंक (12%) का उपयोग करना चाहिए ताकि अन्य खादों के साथ इसका कोई रासायनिक रिएक्शन न हो और पत्तियों के जलने (Burning) का खतरा कम रहे।
पानी की मात्रा और सटीक डोज (प्रति एकड़)
फवारणी करते समय पानी की मात्रा का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि आप एक एकड़ में 200 लीटर पानी का उपयोग कर रहे हैं, तो डोज इस प्रकार होगी:
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यूरिया: 1 किलोग्राम
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मैग्नीशियम सल्फेट: 1 किलोग्राम
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मैंगनीज सल्फेट: 500 ग्राम
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चिलेटेड जिंक (12%): 100 ग्राम
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चिलेटेड आयरन (12%): 100 ग्राम यदि पानी की मात्रा कम (जैसे 100 लीटर) है, तो इन सभी खादों की मात्रा आधी कर देनी चाहिए। कम पानी में अधिक खाद डालने से पत्तियों के किनारों पर जलन हो सकती है, जिससे फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
स्प्रे तैयार करने की विधि और सावधानियां
स्प्रे तैयार करते समय कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं। सबसे पहले, सभी खादों का घोल अलग-अलग प्लास्टिक के बर्तनों में ही बनाएं। धातु के बर्तनों (लोहा या तांबा) का उपयोग बिल्कुल न करें। स्प्रे पंप को पहले पानी से पूरा भर लें, उसके बाद ही तैयार घोल एक-एक करके उसमें मिलाएं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घोल बनाने के बाद उसे छोड़ना नहीं है, बल्कि तुरंत स्प्रे करना है। देर तक घोल रखने से रासायनिक क्रिया हो सकती है जो फसल के लिए हानिकारक हो सकती है। फवारणी करते समय ध्यान रखें कि पत्तियों पर ओस (Dew) न हो और खेत में पर्याप्त नमी हो।
लागत और किसानों को होने वाला लाभ
इस फॉर्मूले की सबसे बड़ी खूबी इसकी कम लागत है। एक एकड़ का कुल खर्च (200 लीटर पानी के साथ) मात्र ₹236 के आसपास आता है। इस स्प्रे के बाद गेहूं का पीलापन दूर हो जाता है, फुटाव (Tillering) बढ़ता है और पौधे स्वस्थ होकर तेजी से बढ़ते हैं। जब गेहूं की बाली निकलने का समय आता है, तो वह स्वस्थ और दानों से भरपूर होती है, जिससे अंतिम पैदावार में显著 वृद्धि देखी जाती है। यह उन किसानों के लिए एक वरदान है जो कम खर्च में अपनी फसल से अधिक उत्पादन लेना चाहते हैं।